समाजसेवी ने खोला जिला प्रशासन की व्यवस्था की पोल

समाजसेवी ने खोला जिला प्रशासन की व्यवस्था की पोल

सागर कुमार,,


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सीतामढ़ी :- रुक रुक कर हो रही वर्षा फिलवक्त जिले वादियों को धीरे धीरे एक बड़ी मुसीबत में डालती का रही है। जिला मुख्यालय से करीब करीब सभी प्रखंडों का संपर्क पानी के वजह से बंद हो चुकी है। बैरगनिया के लाल बकैया, ढेंग के बंगामाती तथा सीतामढ़ी से गुजरने वाली लक्षमना नदी तथा अवापुर, पुपरी से गुजरने वाली अधवारा समूह की नदिया पूरी तरह उफान पर है।

जो लोगो का जन जीवन हद तक प्रभावित कर रही है। इस दौरान समाजसेवी अशेश्चर राय ने  कहा की सीतामढ़ी जिले के बथनाहा परिहार परिहार से भीसवा पथ  भी वर्षों से ध्वस्त है , लेकिन मरम्मत नहीं हो पा रहा है।सुरसंड पुपरी चोरौत बाजपटी बोखरा नानपुर  रुनीसैदपुर बेलसंड सुप्पी परसौनी मेजरगंज बैरगनिया रीगा सोनबरसा अभी भी सीतामढ़ी मुख्यालय से प्रखंड एवं ग्रामीण क्षेत्रो  का संपर्क नहीं हो पाना एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है।


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सीतामढ़ी से निकलने पर कासान  कॉलेज बरियारपुर  के सामने एवं बरियारपुर हाई स्कूल के सामने लोगों के आने जाने में जो परेशानियां हो रही है ,आम आदमी ही  जानते हैं। वही कहा की  सीतामढ़ी से गोबरहिया डायवर्सन   पहुंचे तो देखा कि गोबरिया डायवर्सन भी टूटने के कगार पर था वही चार चक्के का आवागमन अवरुद्ध था, कुमा से पश्चिम पहले लोहा का पुल था आवागमन चालू था लेकिन 15 वर्षों से डायवर्सन बना हुआ है और बाढ़ के समय में आवागमन अवरुद्ध हो जाता है।

जिसके कारण कई प्रखंडों का आवागमन सीतामढ़ी मुख्यालय से संपर्क समाप्त हो जाता है। बाढ़ के दौरान कुम्मा डायवर्शन में नाव चल रहा था पूछने पर बताया कि निजी नाव हैi सरकारी नाव का भी व्यवस्था नहीं किया गया था जो एक सौ से ₹200 भी लोग  देकर आना-जाना करते थे।    बाढ़ प्रभावित लोगों को कहीं भी राशन की व्यवस्था नहीं की गई थी ।कहीं-कहीं तिरपाल तान कर लोग रोड पर शरण लिए हुए है 6000  रुपया घोषणा करने के बावजूद अभी तक बाढ़ प्रभावित लोगों को नहीं मिला है।


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सरकार ने लॉकडाउन के दौरान राशन कार्ड से वंचित व्यक्तियों के लिए भी 5 किलो राशन एवं दाल  उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन आज तक नहीं मिल  पाया है ।खरीफ फसल 2019 का इनपुट का पैसा अभी तक बहुत किसानों को नहीं मिल पाया है ।इतना ही नहीं लॉकडाउन के दौरान अतिवृष्टि  एवं  ओलावृष्टि से गेहूं का फसल बर्बाद हुआ था। अभी तक उसका क्षति पूर्ति का मुआवजा नहीं मिल पाया । सरकार केवल घोषणा करती है लागू नहीं करती है ।  उन्होंने पूरे तिरहुत स्नातक क्षेत्र को बाढ ग्रस्त घोषित करने की मांग राज्य सरकार से की है ।