बिहार विधानसभा से गायब घोडासहन, जाने आज़ादी से अब तक का इतिहास

बिहार विधानसभा से गायब घोडासहन, जाने आज़ादी से अब तक का इतिहास

 


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आज हम पूर्व विधानसभा घोड़ासहन की बात करेंगे. घोड़ासहन विधानसभा की बात करने से पहले बिहार की आम चुनाव की बात करते है. सन 1952 में बिहार में पहला विधानसभा चुनाव हुआ था. इस चुनाव में निर्दलीय सहित कुल 17 पार्टियों ने भाग लिया था. हम बात कर रहे है घोड़ासहन विधानसभा की. पहले चुनाव अर्थात 1952 में घोड़ासहन विधानसभा में कुल 59531 वोटर थे. वही 26 मार्च 1952 को 40.74 प्रतिशत अर्थात 24253 लोगों ने अपना पहला मत पहले विधानसभा चुनाव में दिया. इस चुनाव में कुल 5 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य अजमाया था. समाजवादी पार्टी से राम अयोध्या प्रसाद इंडियन नेशनल कांग्रेस से ध्रूप नारायण त्रिपाठी फॉरवर्ड ब्लाक (मार्क्सिस्ट ग्रुप) से नारायण राम व निर्दलीय रूप में दीनानाथ प्रसाद और राधाकांत सिन्हा मैदान में थे. इस चुनाव में सपा प्रत्याशी राम अयोध्या प्रसाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी इंडियन नेशनल कांग्रेस प्रत्याशी ध्रूप नारायण त्रिपाठी को 2931 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 276 सीटों पर चुनाव हुवा था. इस वक्त इंडियन नेशनल कांग्रेस की सरकार बनी थी जिसने 330 में से कुल 322 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतरा था जिसमें 239 सीटों पर जित हासिल कर अपनी सरकार बनायीं थी. यहाँ आप 276 और 330 को लेकर कंफ्यूज न हो क्योंकि इस वक्त 222 एकल सदस्य व 54 द्वि सदस्ययी विधानसभा था.

अब आते है बिहार के दुसरे आम चुनाव 1957 की ओर.

घोड़ासहन विधानसभा के दुसरे चुनाव में कुल 57791 वोटर्स में से 21096 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल तिन प्रत्याशी मैदान में थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस से मदन प्रसाद यादव, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से राम अयोध्या प्रसाद और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कमलेश्वर प्रसाद आर्य थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मदन प्रसाद यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राम अयोध्या प्रसाद को 1880 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 264 विधानसभा था जिसमें 210 एकल सदस्ययी व 54 द्वि सदस्ययी विधानसभा था जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 312 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 210 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.


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तृतीय चुनाव 1962

घोड़ासहन विधानसभा के तीसरे चुनाव में कुल 59153 वोटर्स में से 29275 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल चार प्रत्याशी मैदान में थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजेंद्र प्रताप सिंह, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से राम अयोध्या प्रसाद, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सत्य नारायण राय आर्य और स्वतंत्र पार्टी से राधाकृष्ण प्रसाद गुप्ता थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राम अयोध्या प्रसाद को 2464 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 318 विधानसभा था. जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने सभी 318 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 185 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.

चौथा चुनाव 1967

घोड़ासहन विधानसभा के चौथे चुनाव में कुल 73889 वोटर्स में से 41995 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल पांच प्रत्याशी मैदान में थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजेंद्र प्रताप सिंह, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से राम अयोध्या प्रसाद, एसएसपी पार्टी से एस.पी. संत, सीपीआई से एम.एम लाल और निर्दलीय आर. कुअर थे. प्रजा सोसलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राम अयोध्या प्रसाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजेंद्र प्रताप सिंह को 9069 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 318 विधानसभा था. जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने सभी 318 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 128 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.


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पांचवा चुनाव 1969

घोड़ासहन विधानसभा के पांचवा चुनाव में कुल 81492 वोटर्स में से 44723 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल पांच प्रत्याशी मैदान में थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजेंद्र प्रताप सिन्हा, भारतीय जन संघ पार्टी से हेमचन्द्र प्रसाद प्रजा सोसलिस्ट पार्टी से राम अयोध्या प्रसाद, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गंगा प्रसाद चौधरी और सीपीआइ पार्टी से लक्ष्मी प्रसाद थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र प्रताप सिन्हा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी गंगा प्रसाद चौधरी को 4767 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 318 विधानसभा था. जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने सभी 318 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 118 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.

छठा चुनाव 1972

घोड़ासहन विधानसभा के छठा चुनाव में कुल 99396 वोटर्स में से 56929 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल पांच प्रत्याशी मैदान में थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजेंद्र प्रताप सिन्हा, NCO पार्टी से मंगल प्रसाद यादव, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ऋषिदेव प्रसाद, स्वतंत्र पार्टी से सोअम्बेर पाण्डेय और भारतीय जन संघ से यमुना राय थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी मंगल प्रसाद यादव को 987 मतों से पराजित किया था. भारतीय जनसंघ का नाम ही आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी हुआ. इस वक्त बिहार में कुल 318 विधानसभा था. जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 259 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 167 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.


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सातवाँ चुनाव 1977

घोड़ासहन विधानसभा के सातवाँ चुनाव में कुल 109810 वोटर्स में से 59769 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल सात प्रत्याशी मैदान में थे. 1975 में आपातकाल के बाद जनसंघ सहित भारत के कुछ पार्टियों ने मिलकर जनता पार्टी बनायी. इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजेंद्र प्रताप सिंह, जनता पार्टी से मंगल प्रसाद यादव, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में रुक्मिणी सिन्हा, रघुनाथ साह, अबू महमद, राम विश्वास प्रसाद कुशवाहा, जिल्दार राम थे. इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी मंगल प्रसाद यादव को 175 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 318 विधानसभा था. जिसमें जनता पार्टी ने 311 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 214 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.

चुनाव 1980

घोड़ासहन विधानसभा के आठवा चुनाव में कुल 121713 वोटर्स में से 76750 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल आठ प्रत्याशी मैदान में थे. इस समय कांग्रेस पार्टी दो भागों में विभक्त हो गई थी . भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (U) जुलाई 1979 में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री डी. देवराज उर्स द्वारा गठित इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस (I) का एक अलग गुट था। विभाजन के उर्स की व्याख्या इंदिरा के बेटे संजय गांधी की पार्टी की पार्टी में वापसी थी। 1980 में जनता पार्टी का विघटन हो गया. जनता पार्टी के विघटन के पश्चात् जनता पार्टी से तिन प्रत्याशी मैदान में थे. इंदिरा समर्थित कांग्रेस(I) से राजेंद्र प्रताप सिंह, डी. देवराज समर्थित कांग्रेस (U) से लाल बाबु प्रसाद जनता पार्टी (जेपी) से राम अयोध्या प्रसाद, जनता पार्टी (एससी) से उमाकांत, जनता पार्टी (एसआर) से हासिम मियां, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लक्ष्मी प्रसाद, राम अयोध्या राय एवम अमरुद्दीन हुसैन थे. राजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी लाल बाबु प्रसाद को 7064 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 324 विधानसभा था. जिसमें इंदिरा समर्थित कांग्रेस पार्टी ने 311 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 169 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.


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चुनाव 1985

घोड़ासहन विधानसभा के नौवें चुनाव में कुल 132483 वोटर्स में से 76115 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल ग्यारह प्रत्याशी मैदान में थे. भारतीय कांग्रेस पार्टी सेप्रमोद कुमार सिंह, लोक दल से लाल बाबु प्रसाद, सीपीआई से कामेश्वर प्रसाद सिंह, जनता पार्टी से जोतिका प्रसाद, इंडियन कांग्रेस (सोसलिस्ट) से गौरी शंकर प्रसाद, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सहेब्जान मियां, विश्वनाथ सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, शिव नंदन सहाय,रघुनाथ साह एवं राम शंकर सिंह थे. प्रमोद कुमार सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी लाल बाबु प्रसाद को 6139 मतों से पराजित किया था. इस वक्त बिहार में कुल 324 विधानसभा था. भारतीय कांग्रेस पार्टी ने 323 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 196 सीटों पर जीतकर अपनी सरकार बनायीं थी.

चुनाव 1990

घोड़ासहन विधानसभा के दसवां चुनाव में कुल 155092 वोटर्स में से 99442 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल चौदह प्रत्याशी मैदान में थे. भारतीय कांग्रेस पार्टी से राजेंद्र प्रताप सिंह, जनता दल से लाल बाबु प्रसाद, भाजपा से अनिल कुमार सिंह, सीपीआई (एमआईएल) से रामबाबू साह जनता पार्टी (जेपी) से प्रमोद कुमार सिंह, बहुजन समाज पार्टी से ए. बहाब, दूरदर्शी पार्टी से बच्चा महतो, अखिल भारतीय जन संघ से विजय ठाकुर और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लक्ष्मी प्रसाद चट्टान, साहेब जान, अभय सिंह, राम देव राय, राम अयोध्या सिंह एवं रामयोध्य प्रसाद सिंह थे. जनता दल प्रत्याशी लाल बाबू प्रसाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी अनिल कुमार सिंह को 41553 मतों से पराजित किया था. यह वही समय था 1988 में गठित जनता दल ने 276 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 122 सीटें जीतकर गठबंधन कि सरकार बनी थी और मुखिया बने लालू प्रसाद यादव. दूसरी बार बिहार में कांग्रेस पार्टी ने 100 से कम सीटें लायी व भाजपा 237 में कुल 39 सीटें जित पायी. इस वक्त बिहार में कुल 324 विधानसभा था.

चुनाव 1995

घोड़ासहन विधानसभा के ग्यारहवें चुनाव में कुल 173512 वोटर्स में से 101193 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल बाईस प्रत्याशी मैदान में थे. भारतीय कांग्रेस पार्टी से राज कुमार प्रसाद, जनता दल से लाल बाबु प्रसाद, समाजवादी पार्टी से लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव, भाजपा से हरीश चन्द्र सिंह, बहुजन समाज पार्टी से शम्भू प्रसाद यादव, दूरदर्शी पार्टी से रामचंद्र साह, समता पार्टी से नवल किशोर यादव, भारतीय प्रगितिशील पार्टी से प्रमोद कुमार सिंह और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कामेश्वर प्रसाद, राजेश्वर प्रसाद, प्रमोद कुमार सिंह, नन्द कुमार प्रसाद, मनोज कुमार जायसवाल, विनोद कुमार सिंह, खुर्साद साह, संजय कुमार, मोहम्मद जफ़र आलम, सुबंश राय, अर्जुन प्रसाद, फूलना सिंह, राजेंद्र राय, हरी शंकर सिंह थे. जनता दल प्रत्याशी लाल बाबू प्रसाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी राज कुमार प्रसाद को 19867 मतों से पराजित किया था. जनता दल ने 264 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 167 सीटें जीतकर सरकार बनायी थी. कांग्रेस पार्टी ने 29 सीटें लायी व भाजपा 315 में कुल 41 सीटें जित पायी. इस वक्त बिहार में कुल 324 विधानसभा था.

चुनाव 2000

घोड़ासहन विधानसभा के बारहवें चुनाव में कुल 177190 वोटर्स में से 106259 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया था. इस वक्त घोड़ासहन विधानसभा क्षेत्र से कुल बारह प्रत्याशी मैदान में थे. भारतीय कांग्रेस पार्टी से कामेश्वरी यादव, जदयू से लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव, समाजवादी पार्टी से राजेश्वर प्रसाद गुप्ता, राजद से लाल बाबु प्रसाद, बहुजन समाज पार्टी से चंद्रदेव प्रसाद, बिहार पीपुल्स पार्टी से महासुंदर देवी, समाजवादी जन पार्टी से राम पुकार सिन्हा और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मुनमुन प्रसाद, राजेश्वर सिंह, भागीरथ पासवान, राम सेवक राम एवं अशोक राम थे. जनता दल यूनाइटेड प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजद प्रत्याशी लाल बाबु प्रसाद को 21031 मतों से पराजित किया था. राष्ट्रिय जनता दल ने 293 सीटों पर चुनाव लड़ी थी व 124 सीटें जीतकर सरकार बनायी थी. जदयू ने 87 में 21 सीटें लायी व भाजपा 168 में कुल 67 सीटें जित पायी. इस वक्त बिहार में कुल 324 विधानसभा था.

चुनाव 2005

फ़रवरी 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में एक लाख निन्यानवे हजार तिन सौ पचहतर लोगों में चौरानवे हजार एक सौ पैतीस लोगो ने अपने मतों का प्रयोग किया. इस चुनाव में कुल 15 प्रत्याशी मैदान में थे. जिसमें राजद प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी लोजपा के उम्मीदवार नेक मोहम्मद को 17528 मतों से पराजित किया. परन्तु इस विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ था. जिससे पुनः नम्बर में चुनाव हुआ और जदयू व भाजपा ने मिलकर अपनी सरकार बनायी. वही नवम्बर में हुए चुनाव में एक लाख छियानवे हजार नौ सौ दो लोगों में से 97282 लोगों ने अपने मतों का उपयोग किया. इस चुनाव में कुल पांच प्रत्याशी मैदान में थे. राजद से लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव, जनता दल यूनाइटेड से प्रमोद कुमार सिन्हा, लोक जन शक्ति पार्टी से नेक मोहम्मद, समाजवादी पार्टी से ओम प्रकाश कुमार, और निर्दलीय सुरेन्द्र कुमार और अशोक राम मैदान में थे. जिसमें राजद प्रत्याशी लक्ष्मी नाराय्लन प्रसाद यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी जदयू प्रत्याशी प्रमोद कुमार सिन्हा को बहुत ही कम वोट यानी मात्र 814 मतों से पराजित किया. इस वक्त बिहार से झारखण्ड अलग हो चूका था और बिहार में कुल विधानसभा कि संख्या 243 हो गयी थी और जदयू ने 139 में 88 व भाजपा ने 102 में 55 सीटों पर जीतकर सरकार बनायी थी.

चुनाव 2010

बिहार विधानसभा चुनाव 2010 में कई विधानसभाओं का परिसिमिन किया गया जिसमें घोडासहन विधानसभा भी शामिल था. घोडासहन विधानसभा का परिसीमन कर घोडासहन प्रखंड को ढाका विधानसभा में मर्ज किया गया और ढाका विधानसभा क्षेत्र संख्या 14 से 21 हो गया. इस तरह घोडासहन विधानसभा से चिरैया प्रखंड हटकर चिरैया विधानसभा बना. नए परिसीमन होने के बाद ढाका विधानसभा में कुल दो लाख इकतीस हजार दो सौ अट्ठाईस में से कुल एक लाख छब्बीस हजार सात सौ सात लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था. 2010 के इस चुनाव में कुल 11 प्रत्याशी मैदान में थे. जनता दल यूनाइटेड से फैसल रहमान, लोक जनशक्ति पार्टी से नेक मोहम्मद, कांग्रेस से अब्दुल हामिद अंसारी, बहुजन समाज पार्टी से जयमंगल प्रसाद, सीपीआई से बेन्देश्वरी प्रसाद, समाजवादी पार्टी (राष्ट्रिय) से सुभाष कुमार सिंह, समस्त भारतीय पार्टी से धरम देव राय, समाजवादी पार्टी से जवाहर लाल प्रसाद, एनसीपी से जनाब अहमद नबी एवं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पवन कुमार जायसवाल, एवं नेक महम्मद मैदान में थे. निर्दलीय प्रत्याशी पवन कुमार जायसवाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी जदयू प्रत्याशी फैसल रहमान को 1649 मतों से पराजित किया था. पवन कुमार जायसवाल को कुल 48100 व फैसल रहमान को कुल 46451 मत प्राप्त हुआ था. जदयू ने 141 में 115 सिट व भाजपा ने 102 में 91 सिट जीतकर एनडीए कि सरकार बनायीं थी.

चुनाव 2015

ढाका विधानसभा चुनाव 2015 में कुल दो लाख पचासी हजार तिन सौ बयालीस वोटरों में से एक लाख छियासी हजार चार सौ बावन लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था. इस चुनाव में कुल 11 प्रत्याशी मैदान में थे. भाजपा से पवन कुमार जायसवाल, राजद से फैसल रहमान, एनसीपी से नेक मोहम्मद, बीएसपी से रामकृत पासवान, आरपीपी से वीरचन्द्र प्रसाद, जीजेडीएस से मोहम्मद आलम एवं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राम पुकार सिन्हा, अनिल कुमार मेहता, प्रभु नारायण, मंजूर अहमद मैदान में थे. राजद प्रत्याशी फैसल रहमान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार जायसवाल को 19197 मतों से पराजित किया. इस चुनाव में राजद व जदयू गठबंधन में चुनाव लड़ रही थी. भाजपा को 157 में 53, राजद को 101 में 80 और जदयू को 101 में 71 सीटों पर चुनाव जीती. राजद के साथ विवादों के कारन जदयू ने राजद से अलग होकर पुनः भाजपा के साथ एनडीए कि सरकार बनायीं.