सुगौली के नगर पंचायत के वार्ड 13 के क्षतिग्रस्त बांध से बाढ़ आने का खतरा।

सुगौली के नगर पंचायत के वार्ड 13 के क्षतिग्रस्त बांध से बाढ़ आने का खतरा।
सुगौली के नगर पंचायत के वार्ड 13 के क्षतिग्रस्त बांध से बाढ़ आने का खतरा।

सुगौली/पू च।प्रखंड क्षेत्र के बीचो बीच होकर बहने वाली सिकरहना नदी(बूढ़ी गंडक) का दक्षिणी रिंग बांध शहरी क्षेत्र में कई जगह ध्वस्त हो चुका है।अब जब मानसून उफान पर है।जिससे एक ओर जहां लोगों की चिंता बढ़ी हुई है तो दूसरी ओर सम्बंधित विभाग बेसुध है।जिसके कारण नदी के भरते पानी बाहर छलक जाएगा।और प्रखंड मुख्यालय ,शहरी आबादी सहित कई क्षेत्र जलमग्न हो जाएंगे।जिससे जानमाल की भारी क्षति होगी। 


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प्रखंड मुख्यालय से सटे तकरीबन एक किलोमीटर दूर उत्तर में सिकरहना नदी का दक्षिणी किनारा कई जगहों पर पिछली बरसात में हीं कट चुका है। नगर पंचायत के वार्ड 13  के धनही गांव से सटे नदी का रिंग बांध जो रेलवे लाइन से एन एच तक जुटा हुआ है।यह बांध धनही गांव के सामने दो जगहों पर करीब तीस-तीस फीट कट कर गढ्ढे में तब्दील हो चुकी है।जिससे नदी का पानी सीधे बाढ़ बन कर वार्ड नम्बर 13,14,15,16,17,18,और 19 सहित कई क्षेत्रों को डुबो देगा।

बाढ़ का प्रभाव-- 


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टूटे रिंग बांध से बाढ़ आने के बाद हजारों की संख्या प्रभावित होगी।प्रखंड मुख्यालय, बाजार, कार्यालय सहित कई वार्डों में बाढ़ का पानी घुस जाएगा।

खेती-किसानी बुरी तरह से प्रभावित होती है।हजारों एकड़ फसल बर्बाद होती है।किसानों की भारी क्षति होती है। कई लोग बाढ़ के पानी मे डूब कर अपनी जान गंवा देते है।


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बाढ़ के पानी के भर जाने से आवागमन बन्द हो जाता है और कई दिनों तक प्रभावित रहता है।सड़के टूट जाती है।बिजली प्रभावित हो जाती है।लोगो की रोजी-रोटी और व्यापार के साथ-साथ पूरा जन-जीवन प्रभावित हो जाता है।

स्थिति-- नदी के किनारे लंबे समय से यह रिंग बांध है।जिस पर मरमम्त और बाढ़ से बचाव के नाम पर प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होता है।और यह बांध बाढ़ में टूट जाती है।और बाढ़ भी झेलना पड़ता है।


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उपेंद्र सहनी ( वार्ड पार्षद पुष्पा देवी के पति )-- ने बताया कि पिछले ढाई महीने पहले नगर पंचायत के प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी संदीप कुमार और तटबन्ध के जेई रविशंकर प्रसाद की टीम ने इस बांध की नापी की थी।पर विभागीय लापरवाही के चलते कुछ नही हुआ।पार्षद पति ने बताया कि नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी पैसा देने के लिए तैयार भी थे।


बाढ़ से बचाव के लिए स्थायी उपाय नही होने में विभागीय लापरवाही साफ-साफ दिखती है।प्रत्येक साल बाढ़ से बचाव के लिए बांध की मरम्मति पर खर्च किया जाना सरकारी पैसे की बरबादी नजर आता है।विभाग के द्वारा जान बूझकर बरसात के समय बांध की मरम्मति की जाती है जो बाढ़ के पानी के साथ बह जाता है।


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ग्रामीणों में उपेंद्र सहनी, बच्चा यादव, परमात्मा सहनी, देवधारी यादव,शिशुपाल सहनी, नवल यादव,राजेश्वर भगत,सरफुद्दीन मियां,शम्भू सहनी, राजेश्वर महतो और अविनाश कुमार सहनी अन्य ग्रामीणों ने सम्बंधित विभाग पर गम्भीर आरोप लगाया।और बाढ़ से बचाव के लिए स्थायी रूप से बांध के निर्माण की मांग की।

ग्रामीणों ने कहा--        

जलेशर सहनी(ग्रामीण)ने कहा कि हर साल यह बांध टूट जाता है।हमलोगों की खेती बारी का भारी नुकसान होता है।घर से निकलना बंद हो जाता है।

अख्तर आलम-- नदी के बाढ़ से बचाने के लिए विभाग के लोग बांध की मरम्मत के नाम पर करोड़ो रूपये खर्च करते है।पर परेशानी रहती हीं है। बाढ़ से हमलोग बर्बाद होते हीं है।

शम्भू सहनी-- इस बांध को मजबूत और ऊंचा बनवाया जाय। जिससे नदी का पानी नही छलके। हमलोगों की फसल बर्बाद हो जाती है।बाढ़ के पानी से घर मे हीं घिर जाते है।

संदीप कुमार( प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी,नगर पंचायत)-- नगर पंचायत से राशि की व्यवस्था की जाने की बात कही गई थी।पर तटबन्ध विभाग नही कर पाया।