दसको बाद भी नहीं शुरू हो सकी सीतामढ़ी से निर्मली के बीच लंबित रेल परियोजना का निर्माण

दसको बाद भी नहीं शुरू हो सकी सीतामढ़ी से निर्मली के बीच लंबित रेल परियोजना का निर्माण

सीतामढ़ी :- चार नई रेल परियोजनाओं में तीन पर ग्रहण लग जाने से मां जानकी की प्राकट्यस्थली का विकास नहीं हो पा रहा है। रेल से यह जिला जुड़ तो गया है लेकिन कई क्षेत्रों से जोड़ने को लेकर रेल मंत्रालय द्वारा बनाई गई परियोजनाएं अधर में लटक गईं, इसका परिणाम है कि अभी भी जिले का समुचित ढंग से जो विकास होना चाहिए , नहीं हो रहा है।


यह भी पढ़े : 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मास्क पहनना साबित हो सकता है खतरनाक

जिले के विकास को लेकर इन रेल परियोजनाओं पर अबर यानी कुछ अधिक धन का आवंटन हो जाए तो सकारात्मक कदम उठा सकती हैं। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद के कार्यकाल में सुरसंड में सीतामढ़ी से निर्मली के बीच नई रेल लाइन बनाने की योजना शुरू करने की बात वर्ष 2008 में सामने गई थी। तब त्तकालिन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने सीतामढ़ी - निर्मली 188.9 किलोमीटर लंबी रेल खंड के निर्माण का शिलान्यास किया था। शिलान्यास 5 जनवरी 2008 को जिले के सुरसंड प्रखंड अंतर्गत किया गया था।

जिसे तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार से पूर्व सांसद नवल किशोर राय ने उक्त रेल खंड की स्वीकृति कराया था। शिलान्यास के करीब चार साल बाद उक्त रेल खंड के निर्माण का पहल शुरू किया गया था। जो बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कमजोर नेतृत्व के वजह से अधर में लटक गई। इस रेल खंड के 80.9 किलो मीटर का भूभाग सीतामढ़ी जिला के अन्तर्गत आता है तो 108.9 किलो मीटर का दायरा क्षेत्र जयनगर और निर्मली में।


यह भी पढ़े : मोतिहारी: प्रवासी मजदूरों के लिए सहारा बनी छतौनी पुलिस, बांट रही खाद्य सामग्री

लंबित तीन रेल परियोजना :-

1, सीतामढ़ी - बापूधाम (मोतिहारी ) भाया शिवहर (हला की इस रेल खंड निर्माण की कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है)
2, सीतामढ़ी - मिर्मली भाया बथनाहा, सोनबरसा, परिहार, सुरसंड, जयनगर, निर्मली
3, सीतामढ़ी - जनकपुर धाम ( नेपाल )भाया बथनाहा, सुरसंड, भिठ्ठामोड

कब और कहां से व किनके द्वारा किया गया लैंड प्लान की शरवे :-

12 जून 2012 को पलामू के एक कम्पनी के इंजीनियर विजय कुमार और रेलवे के अभियंता विनोद कुमार के द्वारा संयुक्त रूप से डुमरा के अम्घाट्टा गुमटी के किलो मीटर संख्या 101.7 किलो मीटर के नजदीक से लैंड प्लान का सर्वे किया गया था।


यह भी पढ़े : अरेराज सोमेश्वर महादेव मंदिर में श्रावणी मेला में नही होगी जलढ़री। 6 जुलाई से 3 अगस्त तक बंद रहेगा कपाट।

अब तक कितने डिप्टी चीफ इंजीनियर बदले गए :-

इस काम का जिम्मा रेलवे के मुख्य अभियंता एस चिटौरिया को सौंपा गया था। जबकि डिप्टी चीफ इंजीनियर के जगह पर संजय कुमार को नियुक्त किये गये थे ,व वरिष्ठ अनुभाग अभियंता निर्माण के जगह बिनोद कुमार हुए थे, इनके निगरानी में उक्त कार्य योजना को पूरा करना था, यहाँ बता दे की अब इस कार्य को लेकर डिप्टी चीफ इंजीनियर के जगह पर आसित कुमार को नियुक्त किये गए, अब प्रेम रंजन साहब को जिम्मा सौंपा गया है।


संबंधित विभाग के द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए 20 किलो मीटर का लैंड प्लान भी तैयार कर विभाग को भेज दिया गया है
इसके बाद से आज दस वर्ष बीत जाने के बाद भी योजना के विकास को लेकर कार्य कराने की स्वीकृति नहीं मिल सकी। दस वर्षों से लोग इंतजार में हैं। कि कहीं सब का साथ सब का विकास करने वाले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर बिहार के सबसे पिछड़ा जिला सीतामढ़ी को इस रेल खंड का निर्माण करा विकासवान  बनवेगी।लेकिन ऐसा नहीं होना मां जानकी की जन्म स्थली के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा। 


यह भी पढ़े : सुगौली:-- रेल पुलिस ने बरामद किया एक युवक का क्षत-विक्षत शव।

यहां से होकर गुजरेगी रेल लाईन

जानकारी के अनुसार अगर उक्त रेल खंड का काम पूरा हुआ तो यह रेल लाइन सीतामढ़ी से अमघटा होते हुए भैरोकोठी, बरियारपुर, बथनाहा, लत्तीपुर, दिग्घी, गोनाही, बेला, परसा, दोस्तियां, चिलारा, हरिहरपुर, दलकवा, राजबाड़ा, पकड़िया, नरंगा, परिहार, मसहां, बनौली, सुरसंड, भित्ठामोड व चुरौत आदि गांवों से गुजरते हुए जयनगर निर्मली को जाएगी।

अब तक भारत सरकार द्वारा इस रेल खंड निर्माण को लेकर निर्गत राशि।

उक्त रेल खंड को लेकर रेलवे ने 122 करोड़ 20 लाख की राशि का आवंटन हो चुकी है। जिसमे से जनवरी 2013 को 14 करोड़ की राशि जिला भू - अर्जन विभाग को दिया जा चुका है। बताते चले कि वर्ष 2012 - 013 में 30 करोड़, 2014 - 014 में 90 करोड़ तथा वर्ष 2014 - 015 में 1 करोड़, 2015 - 016 में 10 लाख, 2016 -017 में 01 करोड़ तथा वर्ष 2018 -019 में 10े लाख की राशि दी गई थी।


यह भी पढ़े : सावन की अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं नेमहादेव पर किया जलाभिषेक ।