1200 प्रवासी मजदूर ट्रेन से पहुचे समस्तीपुर स्टेशन, सरकार के दावे को बताया खोखला

1200 प्रवासी मजदूर ट्रेन से पहुचे समस्तीपुर स्टेशन, सरकार के दावे को बताया खोखला

समस्तीपुर। कोरोना संक्रमण के दौर में अन्य प्रदेशों में फंसे देश भर के मजदूरों और छात्रों का घर पहुंचने का सिलसिला जारी है। कर्नाटक में फंसे मजदूर भी श्रमिक ट्रेन से अपने घर आ रहे हैं। ऐसी एक स्पेशल ट्रेन आज समस्तीपुर स्टेशन पहुंची और इस ट्रैन में 1200 मजदूर सवार थे जिन्हे यहाँ से दरभंगा के लिये रवाना किया गया। हैरानी की बात ये है कि इन मजदूरों से रेल किराया वसूला गया।


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जबकि सरकार बार-बार ये दावा कर रही है कि यात्रा का खर्च उसकी तरफ से उठाया जा रहा है। केरल के त्रिशूर से आये एक मजदूर ने बताया कि सभी लोगों से एक एक हज़ार रूपये किराया वसूला गया। ट्रैन में खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी, कल ट्रैन खुलते समय पांच केला और एक पैकेट दालमूट दिया गया था। उसके बाद कहीं कुछ नहीं मिला कल से आज तक पीने के लिए पानी तक नहीं दी गयी। मजदूरों ने बताया कि 40 दिन से ज्यादा लॉकडाउन के चलते काम नहीं था, जिसके चलते उनके पास न खाने के लिये कुछ था और न पैसे। कई मजदूरों ने बताया कि उन्होंने गांव से किराये के लिये पैसे मंगाये तो किसी ने कहा कि मालिक से उधार लेकर आये हैं।

एक मजदूर ने ये बताया कि टिकट के लिये 1000 रुपये देने पड़े। मजदूरों का यह आरोप इसलिये हैरान करने वाले हैं क्योंकि बीजेपी बार-बार गृह मंत्रालय का हवाला देकर यह दावा कर रही है कि स्टेशन पर टिकट बेचने की इजाजत ही नहीं है। दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस शासित या अन्य गैर-बीजेपी शासित राज्य किराया नहीं चुका रहे हैं। इस ट्रैन में सफर कर रहे महिला और बच्चों का हाल बहुत बुरा था, सब भूख और प्यास से तरप रहे थे। यात्रियों में बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें ट्रैन से कहीं नहीं उतरने दी गयी, पीने के लिए पानी तक लेन के लिए इजाजत नहीं दी गयी।


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सब लोग भूख प्यास से त्राहिमाम क्र रहे थे। समस्तीपुर में ट्रैन रुकी भी, लेकिन किसी उतरने नहीं दिया गया, ट्रैन को सीधे दरभंगा के रवाना कर दिया गया। इस ट्रैन से उतर बिहार के दरभंगा , मधुबनी, सीतामढ़ी सहित कई जिलों के मजदूर अपने घर वापस आएं है। ट्रैन में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया. एक मीटर की दूरी बनाकर सभी यात्रियों को ट्रेन में बैठाया गया था।